जून महिना...पाऊस......शाळा सुरू... नवीन पुस्तके, नवीन गणवेष, नवीन उमेद ......
| येता भरून नभ हे जल मेघयाने |
| होता सुरू झरझरा द्रव पावसाने |
| जाणोन मीही त्वरिता करि कार्य घेतो |
| शालेय वर्ष भरता नव वर्गही तो. || १ || |
| "बापूस" नित्य मजला करि कौतुकेही |
| साहित्य ते नवनवे आणितो त्वरेही |
| आनंद गंध घमता नव पुस्तकांचा |
| गणवेषही नविन तो चमके मुलांचा || २ || |
| ती माय मजसि ममता देते शिदोरी |
| आईमधेच वसतो प्रभू चक्रधारी |
| ताता जननि उभयतां बहु कष्टताती |
| शिक्षीत मजसी करणे इति ध्येय हाती || ३ || |
| शाळा तशीच आमुचि जननी द्वितीया |
| गुरुवर्य सर्व जन ते तरु-कल्प छाया |
| गंगौघ सम प्रवाही जणू ज्ञान गंगा |
| विद्या चिरंतन गमे धवला तरंगा || ४ || |
| वंदून नित्य चरणी गुरु माय-ताते |
| वेचोन ज्ञान कण ते घेतो कराते |
| कीर्ती जगात करितो माझ्या कुळाची |
| सेवा करीत राही मम मायभूची || ५ || |
| .................................अभिनव |
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