| झोप शांत आता बाळा |
| बाप जोजवी आज तुला |
| माझ्याजवळी नाहीत कवने |
| ना अंगाई नाही गाणे |
| हात मात्र पाठीवर ठेवूनि |
| कवेत घेतो आज तुला |
| तुला चुंबिता मला वाटते |
| दाढी माझी तुला टोचते |
| वळवळून तू त्रासिक हसशी |
| गंमत वाटे फार मला |
| आईसम तुज करणे ममता |
| जमतच नाही मजसी करिता |
| माया माझी परी अव्यक्ता |
| कशी पटवू मी सोनफुला |
| घरी तू येशी परी मी नसतो |
| घरी येता तू निद्रित दिसतो |
| रविवार परी तो आपुला असतो |
| आणूया भरती आनंदाला |
| तुझ्या सुखासाठी मी झटतो |
| तुझ्याचसाठी राब-राबतो |
| तू चुकता तुज रट्टे देतो |
| वळ परी उठती मम हृदयाला |
| आकांक्षांचे ओझे काही |
| तुझ्यावरी मी लादत नाही |
| स्वप्ने माझी परी पेरितो |
| तुझ्या रूपाने उगवायाला |
| ..................................अभिनव |
मंगळवार, ३१ जुलै, २०१२
बापाची अंगाई.........!
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